Madhya Pradesh में चल रहे सियासी घमासान के बीच सोमवार का दिन बहुत अहम हो सकता है। राज्यपाल लालजी टंडन के आदेश के अनुसार यदि Madhya Pradesh विधानसभा में Floor Test होता है तो साफ हो जाएगा कि कमलनाथ की मौजूदा सरकार रहेगी या एक बार फिर शिवराज सिंह चौरान का राज लौटेगा। ऐसे में यह जानना अहम हो जाती है कि मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा और कांग्रेस की मौजूदा स्थिति क्या है? हालांकि तमाम उठापटक के बीच भाजपा और कांग्रेस के नेता अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही रहे हैं। वहीं कमलनाथ की कोशिश शक्ति परीक्षण को टालने की है।
मध्य प्रदेश में पांच दिनों से चला आ रहा शह-मात का खेल शुक्रवार को भी जारी रहा। प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए भोपाल से लेकर दिल्ली तक सियासत गर्म रही। कांग्रेस विधायक हरदीप सिंह डंग के इस्तीफे पर अड़े रहने से सियासी संकट और भी गहरा गया है। इस सियासी तूफान के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अगले दो दिनों के अपने सारे कार्यक्रम रद कर दिए हैं।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री लालजी टंडन के मुख्य आतिथ्य में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय का अष्टम दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। समारोह में कृषि, कला, अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी, ग्रामीण विकास एवं व्यवसाय प्रबंध, विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय सहित पी.एच.डी. तथा स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई।
हरियाणा के एक पांच सितारा होटल में मंगलवार रात हुई हाई वोल्टेज ड्रामे को राज्यसभा चुनाव के सियासी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायकों की सरकार से नाराजगी कोई नई नहीं है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस समर्थित 10 विधायकों का दिल्ली में लामबंद होना और हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप चौंकाता है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम से दिग्विजय सिंह का कद बढ़ा है तो सिंधिया का कम हुआ है। लेकिन वहीं, ये भी कहा जा रहा है कि पार्टी सिंधिया और दिग्विजय दोंनो को राज्यसभा नहीं भेजना चाहती है।
जन अधिकार कार्यक्रम विषय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ की अध्यक्षता में 07 मार्च को शाम 07 बजे मंत्रालय स्थित प्रतिकक्ष में आयोजित की गई है।
मध्यप्रदेश की सियासत एक बार फिर से अटकलों पर आ गई है। राज्यसभा चुनाव में दावेदार का चयन कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। वहीं, भाजपा राज्यसभा चुनाव में एक विकल्प देख रही है। सबसे बड़ा सवाल ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयान जहां कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं वहीं, भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर लगातार सॉफ्ट होती जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर सिंधिया को लेकर भाजपा सॉफ्ट क्यों हैं।
मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर से खुलकर गुटबाजी सामने आई है। इस बार कमलनाथ के दो मंत्री और एक विधायक ने सीएम कमलनाथ के कार्यक्रम से दूरी बनी ली। दरअसल, सीएम कमलनाथ बुधवार को धार जिले के डही गांव में सिंचाई परियोजना का शुभारंभ करने पहुंचे थे लेकिन सरकार के दो मंत्रियों ने इस कार्यक्रम से दूरी बना ली।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए वोटिंग होनी है। राज्यसभा पहुंचने की रेस में भाजपा के कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। वर्तमान समीकरण के हिसाब से बीजेपी के खाते में केवल एक सीट जाती हुई दिखाई दे रही है। लेकिन उसके बाद भी दावेदारों की सूची लंबी है। भाजपा के दावेदारों में दो नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है। भाजपा से प्रभात झा फिर से दावेदारी कर रहे हैं। हालांकि इस बार उनका तीसरा टर्म होगा। इसके साथ ही पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के नाम की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार अभी तक रेस में यहीं दोनों नेता सबसे आगे हैं। कैलाश विजयवर्गीय ने लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।
मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर सियासत गर्म है। भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में बयानबाजी कर रही है। भाजपा विधायक विश्वास सारंग ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मध्यप्रदेश में दिखावा हो रहा है। उन्होंने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ वही हुआ है जो कोयला फिल्म में शाहरूख खान के साथ हुआ था।
ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बीच गुना के सर्किट हाउस में सोमवार को मुलाकात होनी थी। दिग्विजय सिंह ने अपने कार्यक्रम की सूची में इस बात का जिक्र भी किया था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ गुना सर्किट हाउस में उनकी मुलाकात होनी है। दोनों नेता गुना तो पहुंचे मगर सर्किट हाउस में होने वाली सीक्रेट मीटिंग नहीं हुई। दो मिनट तक दोनों सड़क पर ही मिले और आगे बढ़ गए।